छत्तीसगढ़ सरकार निवेश, उद्योग और शहरी विकास को गति देने के लिए भवन स्वीकृति और भूमि उपयोग नियमों में बदलाव कर रही है। तय समय सीमा में अनुमति न मिलने पर उसे स्वतः स्वीकृत (डीम्ड अप्रूवल) माना जाएगा। निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा। छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन किया जा रहा है। प्लींथ, कंप्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने की समय सीमा तय होगी। निरीक्षण चार दिन के भीतर और रिपोर्ट 48 घंटे में देनी होगी। थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और सेल्फ सर्टिफिकेशन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। छोटे गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए सड़क चौड़ाई मानकों में छूट दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में एमएसएमई स्थापित करना आसान होगा। भवन अनुमति प्रणाली के लिए ALBPMS सॉफ्टवेयर लागू किया जा रहा है। इसमें ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल हस्ताक्षर, ऑटो-परीक्षण जैसी सुविधाएं होंगी। सभी एनओसी को एकीकृत पोर्टल से जोड़ने की योजना है। फ्लेक्सिबल जोनिंग और मिक्स लैंड यूज मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए 60 वर्गमीटर तक के आवास निर्माण की अनुमति दी गई है। यह ‘वॉक टू वर्क’ मॉडल से जुड़ा है, जिससे शहरी विस्तार नियंत्रित होगा। इन सुधारों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और प्रशासनिक दक्षता सुधरेगी।
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