सुप्रीम कोर्ट ने SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को वैध ठहराया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रक्रिया ने संविधान को नई मजबूती दी है। इस मामले में कोर्ट ने तीन प्रमुख सवालों पर विचार किया, जिनमें यह शामिल था कि क्या चुनाव आयोग को मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार है। दूसरा सवाल यह था कि क्या यह प्रक्रिया वैध उद्देश्य को पूरा करती है और अनुपातिकता के मानदंडों पर खरी उतरती है। तीसरा सवाल यह था कि क्या अपनाई गई प्रक्रिया विधिक ढांचे के अनुरूप है। कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार मौजूद है और प्रक्रिया कानून के दायरे में है। इस फैसले को चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद चुनाव आयोग की भूमिका और मजबूत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य के चुनाव सुधारों के लिए दिशा तय कर सकता है।
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