बिलासपुर जिला कोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल संयुक्त परिवार में रहने से संपत्ति साझा नहीं मानी जा सकती। अदालत ने कहा कि दादा की मौखिक इच्छा के आधार पर संपत्ति पर अधिकार नहीं जताया जा सकता। इस मामले में मोपका और दर्रीघाट की जमीनों पर दीप्ति कशवाल द्वारा किए गए दावे को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है। न्यायालय के अनुसार स्वर्गीय शिवप्यारे अपने वित्तीय निर्णय स्वयं लेते थे। इसलिए उनकी संपत्ति को व्यक्तिगत संपत्ति माना गया। मौखिक सहमति को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना गया। अदालत ने यह भी कहा कि संपत्ति अधिकारों के लिए ठोस दस्तावेज जरूरी होते हैं। इस फैसले को संपत्ति विवाद मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय पारिवारिक संपत्ति विवादों के लिए एक मिसाल बन सकता है।
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