भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित हकीमपुर चेकपोस्ट इन दिनों भावनात्मक दृश्यों का गवाह बन रही है। शाम ढलते ही यहां का माहौल दर्द, डर और अनिश्चितता से भर जाता है। भारत में अवैध प्रवासी घोषित किए गए कई लोग अब बांग्लादेश लौटने को मजबूर हैं। इन लोगों के चेहरों पर अपने टूटते सपनों का दर्द साफ दिखाई देता है। वर्षों तक भारत में रहने के बाद अचानक पहचान और भविष्य दोनों संकट में पड़ गए हैं। सीमा पार करते समय कई परिवार बिछड़ने के डर से परेशान नजर आते हैं। बच्चों और महिलाओं की स्थिति सबसे अधिक संवेदनशील बनी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने भारत को ही अपना घर मान लिया था। अब उनके सामने नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की चुनौती खड़ी है। चेकपोस्ट पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत लोगों को वापस भेज रहा है। स्थानीय लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला केवल अवैध प्रवास का नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि वर्षों से भारत में रह रहे लोगों का भविष्य आखिर क्या होगा। सीमा पर हर शाम कई अधूरी कहानियां और टूटती उम्मीदें दिखाई देती हैं।
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