बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नियों को नौकरानी नहीं माना जा सकता और घर के कामों में कमियों के लिए उन्हें क्रूरता का आरोप नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने तलाक के एक आदेश को पलटते हुए पति को हर महीने 20,000 रुपये का गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि विवाह एक समान साझेदारी है, न कि सेवा का अनुबंध। क्रूरता के लिए गंभीर आचरण की आवश्यकता होती है, न कि छोटे-मोटे विवाद। पति-पत्नी के रिश्ते में समझौता और सहयोग जरूरी है। कोर्ट के इस फैसले से महिलाओं को राहत मिल सकती है। इससे पति-पत्नी के संबंधों में新ी दिशा मिलेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घरेलू कामों में कमी को क्रूरता नहीं माना जा सकता।
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