बॉम्बे हाईकोर्ट में दो घर खरीदारों और एक बिल्डर के बीच फ्लैट का कब्जा नहीं मिलने को लेकर विवाद पहुंचा। खरीदारों ने वर्ष 2014 में अपार्टमेंट खरीदने के लिए बिल्डर के साथ बिक्री समझौता किया था। समझौते के अनुसार, फ्लैट का कब्जा 30 जून 2017 तक दिया जाना था। अपार्टमेंट की निर्धारित कीमत 1.95 करोड़ रुपये थी। हालांकि, शिकायत दर्ज कराने तक दोनों खरीदार बिल्डर को कुल 2.06 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके थे। इस राशि में फ्लैट की कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क और लागू कर भी शामिल थे। इसके बावजूद खरीदारों को फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। बिल्डर ने दलील दी कि खरीदारों द्वारा भुगतान जारी रखने का मतलब देरी को स्वीकार करना था। इस विवाद में खरीदारों ने कानूनी राहत की मांग की। बॉम्बे हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम यानी RERA के प्रावधानों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि RERA के तहत पात्र घर खरीदारों को देरी के लिए मासिक ब्याज पाने का बिना शर्त अधिकार है। इसी आधार पर अदालत ने बिल्डर को वर्ष 2017 से ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया। यह फैसला समय पर कब्जा नहीं मिलने वाले घर खरीदारों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
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