छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गुमशुदगी के मामलों को लेकर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस अब किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करने को लेकर सख्ती बरत रही है। अक्टूबर के शुरुआती 15 दिनों में जिले के 11 थानों में गुमशुदगी के 40 मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140(3) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। लापता लोगों में नाबालिगों से लेकर विवाहित महिलाएं तक शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, जिले में पहली बार केवल 15 दिनों में गुमशुदगी के 40 मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है। इससे पहले आमतौर पर एक महीने में केवल पांच से छह मामलों में एफआईआर दर्ज की जाती थी। अर्जुंदा थाने में सबसे अधिक सात मामले दर्ज किए गए हैं। सनौद थाने में छह, जबकि बालोद, गुंडरदेही और गुरूर थानों में पांच-पांच मामले दर्ज हुए हैं। दल्लीराजहरा और डौंडीलोहारा में तीन-तीन, डौंडी और रनचिरई में दो-दो तथा पुरूर और मंगचुवा में एक-एक मामला दर्ज किया गया है। खबर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई 2026 को गुमशुदा व्यक्ति की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों को सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला न्यायालय के अधिवक्ता धीरज उपाध्याय के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने से पुलिस को मामले की औपचारिक जांच करने में मदद मिलती है। पुलिस शुरुआती जानकारी, संभावित घटनास्थलों, परिचितों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर लापता व्यक्ति की तलाश कर सकती है। यदि अपहरण या किसी अन्य अपराध की आशंका सामने आती है, तो उस पहलू की भी जांच की जा सकती है।
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