पंजाब के फाजिल्का स्थित अनाज मंडी में भारी बारिश के कारण धान की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। बारिश के बाद मंडी में कई जगह खराब हुआ धान बिखरा पड़ा है और पानी के तेज बहाव में बड़ी मात्रा में फसल बह गई। फाजिल्का आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष गोल्डी सचदेवा के अनुसार, प्रशासन को सौंपी गई रिपोर्ट में करीब 2,500 क्विंटल धान बहने का खुलासा हुआ है। इसके अलावा लगभग 70 हजार बोरियां बारिश के पानी में भीग गई हैं। भीगे हुए धान को बोरियों से निकालकर पंखों की मदद से सुखाया जा रहा है और फिर दोबारा पैक किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में आढ़तियों को अतिरिक्त समय, मेहनत और खर्च उठाना पड़ रहा है। आढ़तियों ने सवाल उठाया है कि पहले से खरीदे जा चुके और अब खराब हुए धान के नुकसान की भरपाई कौन करेगा। गांव मुठियावाली के किसान रमेश कुमार ने बताया कि उनकी 15 एकड़ की फसल खरीदी जा चुकी थी, लेकिन बारिश के बाद उसे अस्वीकार कर दिया गया, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ। गांव दलमीर खेड़ा के किसान सराज सिंह की तीन एकड़ की फसल भीगने के कारण काली पड़ गई है। उन्होंने बताया कि बार-बार सुखाने के बावजूद धान की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ और प्रति एकड़ पांच से छह क्विंटल फसल खराब हो गई। किसानों को खराब धान कबाड़ के भाव बेचने की नौबत आ रही है। किसानों ने मांग की है कि सुखाने के बाद बिक्री योग्य बची फसल की तत्काल सरकारी खरीद की जाए और पूरी तरह नष्ट हुई फसल के लिए उचित मुआवजा दिया जाए। नुकसान का आकलन करने के लिए मार्केट कमेटी ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जिसमें आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष, DFSC और खरीद एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं। समिति पानी में बहे धान, खराब हुई फसल और सुखाने के बाद बची उपज का आकलन कर सत्यापन के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर मुआवजे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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