हरियाणा के रोहतक निवासी पवन उर्फ पोना को जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। पवन ने न्याय की उम्मीद में करीब 11 साल जेल में बिताए हैं। वर्ष 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान वह अपने दोस्तों के साथ हांसी के पास हुई हिंसा के बाद वहां पहुंचा था। इस घटना के संबंध में पवन और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या सहित कई मामले दर्ज किए गए थे। हिसार की अदालत ने पवन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई और लंबे समय तक सुनवाई चली। पवन के जीवन में इस दौरान कई व्यक्तिगत दुख भी आए। वर्ष 2011-12 में उसके माता-पिता का निधन हो गया था और बाद में बड़े भाई मोनू की भी मौत हो गई। इसके बाद छोटा भाई सोनू अलग रहने लगा और पवन अकेला पड़ गया। परिवार और दोस्तों ने उसकी रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी, जिसमें संदीप भारती ने भी मदद की। खबर के अनुसार, जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े 23 मामलों में पवन बरी हो चुका है। हालांकि, जेल में एक अन्य कैदी के साथ विवाद से जुड़े मामले के कारण उसकी तत्काल रिहाई में देरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेल से बाहर आने में उसे करीब दो महीने और लग सकते हैं।
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