छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में बदहाल सड़कों और निर्माण कार्यों में देरी को लेकर राज्य सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और बिलासपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश कृष्णराम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि सड़कों का निर्माण और रखरखाव संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। इसके लिए हर बार अदालत के आदेश का इंतजार करना उचित नहीं है। प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर जनहित याचिकाओं पर वर्ष 2021 से सुनवाई चल रही है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। अदालत ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की हालत को विशेष रूप से चिंताजनक बताया। रायपुर में धनेली से विधानसभा रोड तक की बदहाल सड़क का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। कोर्ट ने मुख्य सचिव से 8 अप्रैल 2025 के आदेश पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम ने सड़कों की मरम्मत से संबंधित 78 पन्नों की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कई इलाकों में गड्ढे भरने और पैचवर्क कराने का दावा किया गया है। NHAI ने बताया कि सेंदरी-मोपका बायपास को सौंपने से संबंधित दस्तावेज लोक निर्माण विभाग ने उसी दिन उपलब्ध कराए हैं। प्राधिकरण ने बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे 31 अक्टूबर तक भरने और बड़े निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरे करने की जानकारी दी। नगर निगम ने भी शहर में गड्ढे भरने के बाद डामरीकरण शुरू करने की बात कही। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत स्वीकृत नई सड़कों का काम भी शुरू किया जाएगा। डामर की बढ़ती कीमतों से प्रभावित कार्यों पर राज्य सरकार ने दो-तीन दिनों में निर्णय लेने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई दिवाली के बाद नवंबर में होगी।
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