एक वरिष्ठ नागरिक महिला ने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था। उसके नाम पर 2.42 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट थी। इसके अलावा उसके खाते में 1.06 लाख रुपये की नकद जमा राशि भी थी। आयकर विभाग की ओर से भेजे गए नोटिस का महिला ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद आकलन अधिकारी ने आयकर अधिनियम की धारा 144 के तहत आकलन पूरा किया। अधिकारी ने उसकी कुल आय 5.15 लाख रुपये निर्धारित की। इस राशि को कथित तौर पर अस्पष्टीकृत आय माना गया। मामले में महिला ने बाद में राहत के लिए अपील की। करीब नौ साल बाद मामला आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के सामने पहुंचा। ITAT ने मामले में महिला को राहत दी। न्यायाधिकरण के फैसले के बाद कर आकलन से जुड़ा विवाद उसके पक्ष में सुलझा।
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