दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने किराये के पीजी आवासों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद कई पीजी में रहने वाले लोग अपने किराये के मकानों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। आरोप है कि कुछ जगहों पर ज्यादा मुनाफे के लिए इमारतों में क्षमता से अधिक निर्माण कराया जाता है। कुछ संचालक अतिरिक्त मंजिलें बनाकर किराये से बड़ी रकम कमाने की कोशिश करते हैं। ऐसी होड़ में भवन सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खतरा बढ़ जाता है। सत्य निकेतन हादसे ने पीजी संचालकों की जवाबदेही पर भी बहस तेज कर दी है। सरकार अब पीजी आवासों के लिए नए नियम बनाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नीति में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। पीजी संचालकों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है। संचालकों और कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की जा सकती है। प्रस्तावित नियमों में किराये को नियंत्रित करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए जाने की बात है। सरकार का उद्देश्य पीजी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नए नियम लागू होने पर अवैध या असुरक्षित पीजी संचालन पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। हादसे के बाद किरायेदारों की सुरक्षा और भवनों की संरचनात्मक जांच को लेकर मांग तेज हो गई है।
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