छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की उच्च शिक्षा से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामला स्टडी लीव और उच्च शिक्षा के लिए अनुमति से संबंधित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में रहते हुए स्टडी लीव का लाभ लेने के बाद कर्मचारी दोबारा NOC का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने सेवा नियमों के तहत कर्मचारी के अधिकार और विभागीय अनुमति के प्रावधानों पर विचार किया। फैसले में स्टडी लीव के लाभ को बार-बार लेने के दावे पर स्थिति स्पष्ट की गई। कोर्ट ने माना कि एक बार संबंधित लाभ प्राप्त करने के बाद दोबारा उसी आधार पर NOC मांगने का अधिकार स्वतः नहीं बनता। सरकारी कर्मचारियों के लिए उच्च शिक्षा के दौरान विभागीय नियमों का पालन जरूरी है। अदालत का यह निर्णय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले से स्टडी लीव और उच्च शिक्षा के लिए अनुमति से जुड़े मामलों में स्पष्टता आएगी। विभागीय नियमों के अनुरूप ही कर्मचारियों को आगे की पढ़ाई के लिए अनुमति लेनी होगी। हाई कोर्ट के निर्णय का असर ऐसे मामलों पर पड़ सकता है, जहां कर्मचारी दोबारा उच्च शिक्षा के लिए NOC मांगते हैं। यह फैसला सरकारी सेवा में उच्च शिक्षा संबंधी अनुमति की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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