एक उपभोक्ता आयोग ने कॉर्डलाइफ साइंसेज इंडिया को माता-पिता को ₹2.16 लाख से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामला नवजात शिशु के कॉर्ड ब्लड सैंपल को कथित रूप से नष्ट किए जाने से जुड़ा था। कंपनी ने विलंबित भुगतान का हवाला देते हुए सैंपल को नष्ट कर दिया था। आयोग ने माना कि कंपनी का यह कदम अनुचित और उपभोक्ता हितों के विरुद्ध था। आयोग के अनुसार दंपति ने कभी भी भुगतान करने से इनकार नहीं किया था। उन्हें बकाया राशि जमा करने का उचित अवसर भी नहीं दिया गया। इस कारण कंपनी की कार्यप्रणाली को अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना गया। आयोग ने कंपनी को प्रारंभिक जमा राशि वापस करने का निर्देश दिया। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया। मुकदमे से संबंधित खर्च का भुगतान करने का निर्देश भी कंपनी को दिया गया। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सेवा प्रदाताओं को ग्राहकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए।
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