अस्सा डोरोन और एलेक्स ब्रूम ने भारत में बढ़ते एंटीबायोटिक संकट पर चर्चा की है। दोनों विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल चिकित्सा से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक असमानता से भी प्रभावित है। अस्सा डोरोन ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में मानवशास्त्र और दक्षिण एशिया के प्रोफेसर हैं। एलेक्स ब्रूम सिडनी विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर और स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र के निदेशक हैं। दोनों ने स्वास्थ्य, बीमारी और देखभाल के सामाजिक पहलुओं पर कई अध्ययन किए हैं। उनकी नई किताब ‘ए वर्ल्ड ऑफ रेजिस्टेंस: इंडिया एंड द ग्लोबल एंटीबायोटिक क्राइसिस’ में भारत की एंटीबायोटिक चुनौती पर चर्चा की गई है। विशेषज्ञों ने बताया कि एंटीबायोटिक के उपयोग से जुड़ी समस्याओं के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच इस संकट को और बढ़ाती है। उन्होंने एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत बताई। यह बातचीत भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक संरचना के बीच संबंधों पर प्रकाश डालती है।
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