आइसलैंड में वैज्ञानिकों ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए एक अनोखी तकनीक विकसित की है। वर्ष 2012 से यहां वातावरण से पकड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड को ज्वालामुखीय चट्टानों में जमा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड को पानी में घोलकर जमीन के अंदर गहराई तक पहुंचाया जाता है। वहां यह ज्वालामुखीय चट्टानों के साथ प्रतिक्रिया करके स्थायी खनिजों में बदल जाती है। इस तकनीक से कार्बन दोबारा वातावरण में वापस नहीं लौटता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया को तेज करने का एक प्रभावी तरीका है। यह खोज उन उत्सर्जनों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है जिन्हें खत्म करना मुश्किल होता है। कार्बन कैप्चर और स्टोरेज तकनीक जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परियोजना से भविष्य में बड़े स्तर पर कार्बन प्रबंधन के नए रास्ते खुल सकते हैं। वैज्ञानिक लगातार इस तकनीक को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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