बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौतों के मुआवजे को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आंधी-बारिश के दौरान पेड़ गिरने से हुई मौत को ‘प्राकृतिक आपदा’ के दायरे में माना जाएगा। कोर्ट ने सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें ऐसी घटनाओं को आपदा मानने से इनकार करते हुए मुआवजा देने से मना किया गया था। यह निर्णय उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जिन्होंने प्रतिकूल मौसम और आपदाओं में अपने प्रियजनों को खोया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नीति की व्याख्या करते हुए कहा कि प्राकृतिक शक्तियों के कारण होने वाली अनपेक्षित दुर्घटनाएं आपदा की परिभाषा में आती हैं। इस फैसले से अब प्रशासन को ऐसी घटनाओं में पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा राशि प्रदान करनी होगी। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से प्रशासनिक स्तर पर मिलने वाली राहत में पारदर्शिता आएगी और पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को नीतिगत सुधार करने और पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने के निर्देश दिए हैं।
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