संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर विदेशी सहायता में हुई भारी कटौती का असर 10 लाख से अधिक महिलाओं पर पड़ा है। अमेरिका द्वारा अरबों डॉलर की सहायता राशि में की गई ऐतिहासिक कटौती के बाद कई अन्य प्रमुख दानदाताओं ने भी कदम पीछे खींच लिए हैं। इस वित्तीय संकट के कारण संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में काम करने वाले महिला-केंद्रित संगठनों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। सर्वेक्षण में शामिल 84 प्रतिशत संगठनों का कहना है कि वर्तमान में सहायता की मांग बढ़ गई है, लेकिन फंड के अभाव में वे बुनियादी सेवाएं देने में असमर्थ हैं। लगभग 90 प्रतिशत संगठन अपनी कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए भारी संघर्ष कर रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई सामाजिक कार्यकर्ता बिना वेतन के काम करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही, संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि पीड़ितों की मदद करने वाली प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं। फंडिंग में यह कमी दुनिया भर में महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा अधिकारों के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन संगठनों को प्राथमिकता देने और तत्काल वित्तीय निवेश बढ़ाने की पुरजोर अपील की है। आने वाले समय में स्थिति और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई गई है।
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