मध्य प्रदेश के ग्वालियर में फूड सेफ्टी विभाग की एक कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने डेयरी संचालक पर लगाया गया 1 लाख रुपये का जुर्माना निरस्त कर दिया है। यह मामला खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ी खामी को उजागर करता है। विभाग ने डेयरी से नमूने तो लिए थे, लेकिन रिपोर्ट आने में काफी देरी कर दी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि देरी के कारण नमूने की गुणवत्ता और साक्ष्य की वैधता प्रभावित होती है। कानून के अनुसार रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर दी जानी चाहिए थी, जिसका पालन नहीं हुआ। अदालत ने माना कि रिपोर्ट में अत्यधिक विलंब से संचालक को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिला। इस तकनीकी आधार पर कोर्ट ने विभाग की कार्रवाई को दोषपूर्ण माना है। न्यायाधीश ने जोर दिया कि प्रशासन को कार्रवाई करते समय नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। यह फैसला उन सभी व्यापारियों के लिए राहत की बात है जिन्हें प्रशासनिक लापरवाही का सामना करना पड़ता है। इस फैसले के बाद फूड सेफ्टी विभाग को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। प्रशासन के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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