बिलासपुर में नगर निगम के पानी टंकियों की नियमित सफाई के दावे पूरी तरह झूठे साबित हो रहे हैं। व्यापार विहार स्थित 21 लाख लीटर क्षमता वाली टंकी की सफाई के दौरान करीब 20 बाल्टी रेत, काई और मलबा निकला। रिकॉर्ड के अनुसार, इस टंकी की पिछली सफाई अगस्त 2025 में हुई थी, जबकि कुदुदंड जैसी बड़ी टंकी मार्च 2025 से साफ नहीं हुई है। वार्डों में लोगों को गंदा और मटमैला पानी मिलने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। पार्षदों ने आरोप लगाया है कि सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और अब पूर्व सूचना भी नहीं दी जाती। अमृत मिशन लाइन के बाद से जलापूर्ति में दूषित पानी आने की समस्या और गंभीर हो गई है। नगर निगम हर साल क्लोरीन पर सवा करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है, फिर भी पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग का तर्क है कि दिसंबर-जनवरी में सफाई हुई थी और क्लोरीनेशन के कारण पानी सुरक्षित है। सफाई के सत्यापन के लिए जीपीएस फोटोग्राफी का दावा किया जा रहा है। लापरवाही के कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन द्वारा सफाई कार्य में बरती जा रही अनियमितताओं ने व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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