एक दिग्गज निवेशक की टिप्पणी के बाद देश में कॉलेज शिक्षा और कौशल आधारित रोजगार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल करने के बजाय व्यावहारिक कौशल सीखना अधिक फायदेमंद हो सकता है। उनका मानना है कि कई कॉलेज अब रटकर पढ़ाई कराने तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने रोजगार बाजार की बदलती जरूरतों पर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि आज कंपनियां केवल डिग्री नहीं बल्कि वास्तविक कौशल और अनुभव को प्राथमिकता दे रही हैं। इस बहस में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने भी युवाओं को पारंपरिक डिग्री और यूपीएससी की अंधी दौड़ से बाहर निकलने की सलाह दी है। उनका जोर नई तकनीकों, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में स्किल आधारित शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कई लोग उच्च शिक्षा के महत्व को भी उतना ही आवश्यक मानते हैं। इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
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