चीन ने हाल ही में रूस के साथ संयुक्त अभ्यास के दौरान पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। इस घटनाक्रम के बाद भारत अपनी मिसाइल रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। भारत बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसमें स्वदेशी तकनीक के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी शामिल है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने तेज और लंबी दूरी की मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर का परीक्षण किया है। भारत हाइपरसोनिक और MIRV तकनीक वाली मिसाइलों से निपटने के लिए उन्नत इंटरसेप्टर विकसित कर रहा है। देश अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए मिसाइल पनडुब्बियों के विकास पर भी काम कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत मिसाइल रक्षा प्रणाली रणनीतिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की कोशिश संभावित खतरों का मुकाबला करने के साथ-साथ जवाबी क्षमता बनाए रखने की है। आने वाले समय में रक्षा तकनीक और मिसाइल प्रणालियों के विकास पर और जोर दिया जाएगा।
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