वेदांता ने डिमर्जर के बाद अगले तीन से पांच वर्षों में 20 अरब डॉलर निवेश की योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य विभिन्न कारोबारों के विस्तार और भविष्य की विकास परियोजनाओं को गति देना है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा आंतरिक नकदी प्रवाह से जुटाया जाएगा। कंपनी बाहरी कर्ज पर निर्भरता कम रखने की रणनीति अपना रही है। प्रबंधन ने कर्ज घटाने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। बेहतर नकदी प्रबंधन के जरिए वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है। डिमर्जर के बाद अलग-अलग कारोबारी इकाइयों को अधिक स्वतंत्रता और दक्षता मिलने की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि इससे निवेश और संचालन में तेजी आएगी। वेदांता दीर्घकालिक विकास और लाभप्रदता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। आने वाले वर्षों में यह निवेश कंपनी की विस्तार योजनाओं और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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