ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के ज्ञात यूरेनियम भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा मौजूद है। इसी को देखते हुए भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते की तैयारी कर रहा है। दोनों देशों ने एक दशक से भी पहले इस संबंध में एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान परमाणु ऊर्जा के अलावा कई अन्य रणनीतिक क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी नए समझौते हो सकते हैं। इन समझौतों को अंतिम रूप देने या आगे बढ़ाने पर दोनों देशों के बीच चर्चा होगी। यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग का विस्तार वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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