मनोविज्ञान के अनुसार हर समय दूसरों की मदद करने की आदत कई बार गहरी भावनात्मक असुरक्षाओं से जुड़ी हो सकती है। कुछ लोग अपनी उपयोगिता के माध्यम से स्वयं को मूल्यवान महसूस करने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञ इस व्यवहार को ‘केयरटेकर’ प्रवृत्ति के रूप में देखते हैं। ऐसे लोग अक्सर दूसरों की हर छोटी-बड़ी जरूरत पूरी करने का प्रयास करते हैं। वे भावनात्मक सहारा देने से लेकर व्यक्तिगत मदद तक हर समय उपलब्ध रहते हैं। कई बार वे अपनी जरूरतों और भावनाओं को पीछे छोड़ देते हैं। इससे रिश्ते एकतरफा होने लगते हैं और उन्हें अपेक्षित सम्मान या अपनापन नहीं मिल पाता। लगातार दूसरों के लिए उपलब्ध रहने से मानसिक और शारीरिक थकान भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रिश्तों के लिए मदद के साथ-साथ अपनी सीमाएं तय करना भी जरूरी है। यह निष्कर्ष मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है और हर व्यक्ति के अनुभव अलग हो सकते हैं।
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