राजनांदगांव बौद्ध कल्याण समिति ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों में महत्वपूर्ण सुधारों की मांग की है। समिति ने आग्रह किया है कि स्कूलों में प्रतिदिन भारतीय संविधान की प्रस्तावना का अनिवार्य वाचन शुरू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़े। साथ ही, समिति ने किसी विशेष धर्म से जुड़ी प्रार्थनाओं, मंत्रों या धार्मिक अनुष्ठानों की अनिवार्यता को समाप्त करने की वकालत की है। अध्यक्ष दीपंकर खोब्रागढ़े के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि संविधान देश का सर्वोच्च दस्तावेज है और स्कूलों में धार्मिक गतिविधियों की अनिवार्यता संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुकूल नहीं है। समिति का मानना है कि सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत धार्मिक आस्था का सम्मान होना चाहिए और शैक्षिक वातावरण में संवैधानिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यह मांग राज्य के शैक्षणिक ढांचे में धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है, जिस पर अब प्रशासन के रुख का इंतजार है।
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