उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 के दौरान कैमरा ट्रैप में ढोल यानी भारतीय जंगली कुत्तों का झुंड रिकॉर्ड किया गया है। इस दुर्लभ दृश्य ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों में उत्साह बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ढोल की मौजूदगी जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। यह संतुलित खाद्य-श्रृंखला और बेहतर वन प्रबंधन का भी प्रमाण माना जा रहा है। रिजर्व क्षेत्र में हाल के वर्षों में व्यापक संरक्षण कार्य किए गए हैं। लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इसके साथ ही वन विभाग ने सघन एंटी-पोचिंग अभियान भी चलाए हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी के रूप में सामने आ रहा है। ढोल एक संकटग्रस्त प्रजाति है, जिसकी वापसी संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संकेत भविष्य में जैव विविधता के और मजबूत होने की उम्मीद बढ़ाते हैं। वन विभाग संरक्षण कार्यों को लगातार आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इस उपलब्धि को क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
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