अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ा है। हालांकि शुक्रवार को कीमतों में मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान इसमें पांच से छह प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। दोनों देशों के बीच फिर से शुरू हुए हमलों ने तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं। दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्ग ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ को खोलने में हो रही देरी ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले और जवाब में अमेरिकी कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति जोखिमों के कारण कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। दूसरी ओर, मुद्रास्फीति और कमजोर वैश्विक मांग की चिंताओं ने कीमतों में भारी उछाल को सीमित कर दिया है। चीन में उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंचने से निर्माताओं पर दबाव बढ़ गया है। बाजार अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों और संघर्ष के भविष्य पर बारीकी से नजर रख रहा है। फिलहाल, ऊर्जा क्षेत्र में आपूर्ति की बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ओपेक और अन्य उत्पादक देश भी इस स्थिति का आकलन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में संघर्ष का रुख तेल की कीमतों की दिशा तय करेगा।
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