ज़्यूरिख ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रस्तावित अधिकांश नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं 2030 तक गंभीर जलवायु जोखिमों का सामना कर सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 90% परियोजना स्थल बाढ़ और जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं के उच्च या गंभीर जोखिम क्षेत्र में आते हैं। यह स्थिति देश के ऊर्जा संक्रमण के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। हालांकि कई परियोजनाएं अभी निर्माण या विकास चरण में हैं, इसलिए अभी से सुरक्षा उपाय अपनाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि परियोजना लागत (CAPEX) का लगभग 2% खर्च कर जलवायु-रोधी ढांचा तैयार किया जा सकता है। इससे भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान को लगभग 75% तक कम किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बेहतर योजना और जोखिम मूल्यांकन से ऊर्जा ढांचे को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। जलवायु अनुकूल तकनीक और डिजाइन अपनाने से परियोजनाओं की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है। सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को इस दिशा में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। यह कदम भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को सुरक्षित और मजबूत बनाने में मदद करेगा।
Source: Source