चंडीगढ़ के इंटरनेशनल स्नूकर खिलाड़ी मेहुल और गुरदासपुर के पंकज महाजन की नशे से जंग और जीत की कहानी युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है। एक ओर मेहुल, जो जन्मदिन की पार्टी में दोस्तों के बहकावे में आकर ‘चिट्टा’ का शिकार हुआ और 6 साल तक मौत के मुहाने तक पहुंचा, तो दूसरी ओर पंकज, जिसने फेयरवेल पार्टी से शुरुआत की और इंजेक्शन तक की लत से गुजरते हुए आत्मघाती दौर देखा। दोनों ने न केवल नर्क जैसी जिंदगी से वापसी की, बल्कि अब वे पंजाब सरकार के नशा मुक्ति अभियान के ब्रांड एंबेसडर बनकर समाज के अन्य युवाओं को सही राह दिखा रहे हैं। मेहुल की मां के आंसुओं और पंकज के कमरे में खुद को बंद कर नशे की तड़प झेलने के दृश्यों ने उनकी इच्छाशक्ति को जगाया। मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए गए ये युवा अब एक खुशहाल और नशा-मुक्त जीवन जी रहे हैं।
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