मुंबई की एक अदालत ने 32 साल पुराने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA) के मामले में एक व्यवसायी को बरी कर दिया है। यह मामला तीन दशक से अधिक समय से लंबित था, जिसमें व्यवसायी पर नियमों के उल्लंघन का आरोप था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को निर्दोष पाया। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि इतने वर्षों तक चले मुकदमे में कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया जा सका। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए व्यवसायी को सभी आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया। यह निर्णय व्यवसायी के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है, जो इतने वर्षों से कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने मामलों में साक्ष्यों का मिट जाना अक्सर बरी होने का कारण बनता है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इतनी लंबी अवधि के बाद फैसला आना न्याय प्रणाली की गति पर सवाल खड़े करता है। फैसले के बाद व्यवसायी ने अदालत के प्रति आभार व्यक्त किया। सरकारी वकील इस मामले में कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। लंबे समय तक चले इस कानूनी विवाद के खत्म होने से अब संबंधित पक्षों ने राहत की सांस ली है। न्यायालय ने अपना आदेश सुनाते हुए केस को आधिकारिक रूप से बंद करने का निर्देश दिया है।
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