जस्टिस एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष को लेकर एक अत्यंत गंभीर रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इजरायली सैनिकों ने फिलिस्तीनी बच्चों को कथित तौर पर ‘टारगेट प्रैक्टिस’ के लिए इस्तेमाल किया है। इस भीषण युद्ध में अब तक 20,000 लोगों की मौत हो चुकी है और 44,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। आयोग ने इस बात की गहन जांच की है कि क्या गाजा पट्टी में इजरायली बलों द्वारा फिलिस्तीनी बच्चों की जानबूझकर हत्या की गई है। रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ हुई हिंसा के भयावह विवरण सामने रखे गए हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। मानवाधिकार संगठनों ने इस रिपोर्ट को नरसंहार के आरोपों की पुष्टि करने वाला एक अहम दस्तावेज बताया है। जांच टीम ने प्रभावित क्षेत्रों से साक्ष्य जुटाए और पीड़ितों के परिवारों से विस्तृत पूछताछ की है। रिपोर्ट में बच्चों के अधिकारों के घोर उल्लंघन और युद्ध अपराधों की ओर स्पष्ट इशारा किया गया है। अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को लेकर आयोग ने इजरायली सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र के इस खुलासे के बाद दुनिया भर में इजरायल के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। यह रिपोर्ट अब गाजा में चल रहे मानवीय संकट की गंभीरता को वैश्विक मंच पर उजागर कर रही है।
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