पंजाब की ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी का जीवन लोक सेवकों के लिए साहस और सत्यनिष्ठा का एक ज्वलंत उदाहरण है। साल 2009 में, अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए उन्होंने एक ऐसेमिस्ट (chemist) का लाइसेंस रद्द कर दिया था, जो नशीली दवाओं के दुरुपयोग में लिप्त था। इस निर्णय के लगभग एक दशक बाद, उसी दुकानदार ने उनके कार्यालय में घुसकर उनकी हत्या कर दी और बाद में स्वयं भी आत्महत्या कर ली। यह दुखद घटना यह रेखांकित करती है कि सिविल सेवा में प्रवेश केवल एक शुरुआत है; वास्तविक चुनौती तो उसके बाद शुरू होती है। नेहा शौरी का बलिदान सिखाता है कि किस प्रकार एक लोक सेवक को दबावों, प्रलोभनों और खतरों के बावजूद अपने नैतिक मूल्यों और जवाबदेही पर अडिग रहना पड़ता है। यह कहानी हर उस अभ्यर्थी के लिए एक सीख है जो प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखता है कि सत्यनिष्ठा केवल किताबों का हिस्सा नहीं, बल्कि फील्ड में हर दिन निभाने वाली एक कठिन जिम्मेदारी है।
Source: Source