हाई कोर्ट ने सरकारी जमीन पर कब्जे से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि सामाजिक सेवा के नाम पर कोई भी व्यक्ति या संस्था सरकारी जमीन पर अधिकार का दावा नहीं कर सकती। कोर्ट ने योग केंद्र को हटाने के आदेश को बरकरार रखा। मामले में संबंधित संस्था ने सरकारी भूमि पर अपनी गतिविधियां संचालित की थीं। संस्था की ओर से इसे सामाजिक सेवा का कार्य बताया गया था। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति का उपयोग नियमों के अनुसार ही किया जा सकता है। सामाजिक उद्देश्य का हवाला देकर अवैध कब्जे को सही नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई को उचित माना। इस फैसले से सरकारी जमीनों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट संदेश गया है। अधिकारियों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने का अधिकार है। निर्णय सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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