वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। हालांकि नई कर व्यवस्था में कई रियायतें दी गई हैं, फिर भी अनेक करदाता पुरानी व्यवस्था को पसंद कर रहे हैं। पुराने टैक्स सिस्टम में विभिन्न कटौतियों और छूटों का लाभ मिलता है। कर की गणना के लिए सबसे पहले कुल वार्षिक आय निर्धारित की जाती है। इसके बाद लागू कटौतियों और छूटों को आय से घटाया जाता है। शुद्ध कर योग्य आय के आधार पर टैक्स स्लैब लागू किए जाते हैं। पुरानी व्यवस्था में निवेश आधारित कर लाभ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई करदाता इसी कारण इसे अधिक लाभदायक मानते हैं। नई व्यवस्था में कम टैक्स दरें हैं, लेकिन अधिकांश कटौतियां उपलब्ध नहीं होतीं। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करना आवश्यक है। करदाता को अपनी आय और निवेश के अनुसार विकल्प चुनना चाहिए। सही गणना से टैक्स देनदारी को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। आईटीआर दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति के आधार पर पुरानी व्यवस्था कई लोगों के लिए अब भी फायदेमंद हो सकती है।
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