याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने विवाह अधिकारी को निर्देश देने की मांग की। मांग थी कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत निर्धारित 30 दिन की नोटिस अवधि में छूट दी जाए। वैकल्पिक रूप से नोटिस अवधि को शिथिल करने का अनुरोध किया गया। याचिकाकर्ता जल्द विवाह संपन्न कराना चाहते थे। उन्होंने 10 जून 2026 से पहले विवाह कराने की अनुमति मांगी। मामले में दूल्हे की विदेश में रोजगार संबंधी समयसीमा का भी उल्लेख किया गया। याचिका का आधार इसी तात्कालिक आवश्यकता पर रखा गया था। अदालत ने नोटिस अवधि से छूट देने की मांग स्वीकार नहीं की। हाईकोर्ट ने वैधानिक प्रावधानों में हस्तक्षेप से इनकार किया। इसके साथ ही निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया। मामला विशेष विवाह अधिनियम की अनिवार्य नोटिस अवधि से जुड़ा रहा।
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