छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने MBBS सेवा बांड को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार निर्धारित छह माह की अवधि में नियुक्ति आदेश जारी नहीं करती है तो सेवा बांड स्वतः निरस्त माना जाएगा। मामले में नियुक्ति प्रक्रिया और काउंसलिंग में देरी पाई गई। कोर्ट ने माना कि तय समयसीमा के बाद जारी किए गए नियुक्ति आदेश लागू नहीं किए जा सकते। न्यायालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में मेडिकल स्नातकों को बांड की शर्तों से बांधा नहीं जा सकता। फैसले के तहत प्रभावित MBBS स्नातकों को उनकी डिग्री देने का निर्देश दिया गया। साथ ही उन्हें बिना किसी दंड के अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की अनुमति दी गई। राज्य सरकार ने बांड राशि वसूलने का दावा किया था। अदालत ने इस दावे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समयसीमा का पालन करना राज्य की जिम्मेदारी है। सरकारी देरी का भार छात्रों पर नहीं डाला जा सकता। यह निर्णय उन मेडिकल छात्रों के लिए राहत लेकर आया है जो नियुक्ति आदेशों में विलंब से प्रभावित हुए थे। फैसले से सेवा बांड से जुड़े मामलों में समयबद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के महत्व को भी रेखांकित किया गया है।
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