कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात में से पांच सीटों पर जीत हासिल की। चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। कांग्रेस की सफलता के पीछे विपक्षी खेमे में कथित क्रॉस-वोटिंग को बड़ा कारण माना जा रहा है। आरोप है कि भाजपा और जेडी(एस) के कुछ सदस्यों ने पार्टी लाइन से अलग मतदान किया। बताया जा रहा है कि लगभग 12 अतिरिक्त वोटों ने चुनावी समीकरण बदल दिए। इन वोटों की बदौलत कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षा से बेहतर रहा। परिणाम मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। कांग्रेस ने इसे अपनी नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर जनता व जनप्रतिनिधियों के भरोसे का संकेत बताया है। वहीं विपक्षी दलों में क्रॉस-वोटिंग को लेकर मंथन शुरू हो गया है। चुनाव नतीजों ने भाजपा और जेडी(एस) की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम राज्य की आगामी राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस के लिए यह जीत संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक बढ़त का संकेत मानी जा रही है। कर्नाटक की राजनीति में इस चुनाव के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
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