छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कोरबा जिले की कुसमुंडा विस्तार परियोजना से जुड़े 23 भू-विस्थापितों की याचिकाएं मंजूर कर लीं। अदालत ने माना कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। फैसले में रोजगार से संबंधित दावों को महत्व दिया गया है। न्यायालय ने एसईसीएल की विवादित नीति को स्वीकार नहीं किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जमीन अधिग्रहण के बाद उन्हें रोजगार नहीं दिया गया। अदालत ने मामले में प्रभावित लोगों के पक्ष को उचित माना। यह निर्णय भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले से परियोजना प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश भविष्य के समान मामलों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
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