रूसी समुद्री कच्चे तेल पर लागू अमेरिकी प्रतिबंध छूट की अवधि समाप्त हो गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को इस छूट को आगे बढ़ाने की घोषणा नहीं की। यह छूट आधी रात को समाप्त हो गई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसके बाद प्रतिबंध तुरंत दोबारा लागू होंगे या नहीं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल बाजार में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। रूस से मिलने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञ घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। यदि प्रतिबंध कड़े होते हैं तो तेल आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव आ सकता है। भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर विचार करना पड़ सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक हालात आने वाले दिनों में तेल कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।
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