चंडीगढ़ में हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी होने के आधार पर पेंशन अधिकारों में भेदभाव नहीं किया जा सकता। इस मामले में पहले दिए गए आधी पेंशन के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि विवाह कानूनी रूप से मान्य है और सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो दूसरी पत्नी को भी पूरी पारिवारिक पेंशन का अधिकार मिलेगा। इस फैसले से सरकारी विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिला है। अदालत ने यह भी कहा कि पेंशन अधिकार सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा हैं और इनमें अनुचित कटौती नहीं की जा सकती। इस निर्णय को समानता और न्याय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले के बाद कई समान विवादों पर भी असर पड़ने की संभावना है। प्रशासनिक स्तर पर पेंशन नियमों की समीक्षा की उम्मीद जताई जा रही है। यह फैसला पेंशन से जुड़े कानूनी ढांचे को और स्पष्ट करता है।
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