हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला में चल रहा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में पहुंचते ही गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया है। 542.89 करोड़ रुपये के कुल बजट वाली इस परियोजना में अब 82.73 करोड़ रुपये की देनदारी सामने आई है, जबकि बैंक में केवल 62.28 करोड़ रुपये बचे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कागजों पर भले ही कुछ राशि बची दिखाई दे रही हो, लेकिन वास्तविक देनदारियां अधिक होने के कारण परियोजना घाटे में पहुंच गई है। परियोजना में विभिन्न विकास कार्यों और प्रशासनिक खर्चों को लेकर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे हैं। बहुचर्चित अंडरग्राउंड डस्टबिन प्रोजेक्ट में गड़बड़ी की जांच राज्य विजिलेंस विभाग को सौंपी गई है। अधिकारियों के अनुसार इस योजना का खाका शहरी विकास विभाग शिमला ने तैयार किया था। टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े निर्णय विभिन्न स्तरों पर लिए गए थे। केंद्र सरकार को भेजे गए वित्तीय रिकॉर्ड में कई लेनदेन का उल्लेख नहीं होने की बात भी सामने आई है। इससे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित वित्तीय हेरफेर पर सवाल उठे हैं। परियोजना की समाप्ति से पहले यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
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