दिल्ली सरकार 2028 से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई उपभोक्ता अभी भी पेट्रोल बाइक को प्राथमिकता दे रहे हैं। शहर के भीतर दैनिक यात्रा करने वालों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन कम खर्चीले साबित हो सकते हैं। इसके बावजूद लंबी दूरी की यात्रा को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता और पहुंच को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वाहन खराब होने की स्थिति में सर्विस और मरम्मत सुविधाओं पर भी उपभोक्ताओं को भरोसा नहीं है। कई सवारों का मानना है कि पेट्रोल बाइक अभी अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद विकल्प हैं। इसी कारण नई वाहन खरीद में पेट्रोल दोपहिया वाहनों का दबदबा बना हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकृति बढ़ रही है, लेकिन गति अपेक्षा से धीमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे के बिना व्यापक बदलाव मुश्किल होगा। भारत के विशाल दोपहिया बाजार को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने के लिए अभी कई चुनौतियों का समाधान करना बाकी है।
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