चंडीगढ़ प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम उठाते हुए शहर का विस्तृत कार्बन फुटप्रिंट और कार्बन स्टॉक असेसमेंट करने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पूरे शहर को 2×2 किलोमीटर के ग्रिड में विभाजित किया जाएगा, जहाँ हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी और जीआईएस (GIS) मैपिंग के माध्यम से प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की सटीक पहचान की जाएगी। यह अध्ययन ऊर्जा, परिवहन, उद्योग, कचरा प्रबंधन और कृषि जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का आकलन करेगा। साथ ही, सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी सहित शहर के 4,500 हेक्टेयर ग्रीन कवर की कार्बन अवशोषण क्षमता का भी वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा, जिसमें मिट्टी और जड़ों के बायोमास की गणना भी शामिल होगी। प्रशासन इस डेटा का उपयोग 2030 तक का जलवायु रोडमैप तैयार करने के लिए करेगा। उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ पहले से ही सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और साइकिलिंग को बढ़ावा देकर कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी ला चुका है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच शहर की वार्षिक कार्बन बचत 5.65 किलोटन से बढ़कर 150 किलोटन तक पहुंच गई है। यह नया अध्ययन शहर को देश के अग्रणी ‘लो-कार्बन’ शहरों में शुमार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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