छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता की लगातार अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की है। बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इस स्थिति को गंभीरता से लिया। अदालत ने उल्लेख किया कि आरोपी के वकील 10 जून 2025 से लगातार सुनवाई में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। न्यायालय ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं होने दिया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि किसी आरोपी को प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार प्राप्त है। वकील की अनुपस्थिति के कारण मामले की सुनवाई प्रभावित हो रही थी। इस स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। अदालत ने आरोपी को निःशुल्क सरकारी अधिवक्ता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी को उचित कानूनी सहायता मिल सके। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्याय तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है। अदालत ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया। न्यायिक प्रक्रिया में अधिवक्ताओं की नियमित उपस्थिति के महत्व को भी रेखांकित किया गया। आदेश से यह संदेश गया है कि अदालतें मामलों के अनावश्यक लंबित रहने को गंभीरता से देखती हैं। साथ ही, किसी भी पक्ष के अधिकारों से समझौता किए बिना न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना न्यायालय की प्राथमिकता है।
Source: Source