पंजाब में मुहर्रम का चांद दिखने के साथ ही इस्लामी नए साल की शुरुआत हो गई है और 26 जून को यौम-ए-आशूरा मनाया जाएगा। यह दिन पैगंबर हज़रत मोहम्मद के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने तीन दिनों की भूख और प्यास के बावजूद अन्याय के खिलाफ सिर नहीं झुकाया और अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यौम-ए-आशूरा का अर्थ है मुहर्रम का दसवां दिन, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का शाश्वत संदेश देता है। यह दिन न केवल ऐतिहासिक बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। अलग-अलग संप्रदायों में इसे मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। शिया समुदाय इस दिन को शोक और मातम के रूप में मनाता है, जिसमें ताजिया जुलूस और मज्लिस का आयोजन प्रमुख है। वहीं, सुन्नी समुदाय इस दिन अल्लाह के प्रति आभार व्यक्त करता है और नफ़्ल रोज़े रखकर मस्जिदों में विशेष इबादत करता है। शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी ने सभी को नए साल की मुबारकबाद दी है। यह दिन दुनिया को अधर्म के खिलाफ खड़े रहने और धैर्य रखने की सीख देता है। संपूर्ण मुस्लिम समुदाय इस दिन इंसानियत के लिए इमाम हुसैन द्वारा दिए गए बलिदान को याद करता है। देश में अमन, चैन और भाईचारे की दुआएं की जाती हैं। यह पर्व बलिदान और सत्य के मार्ग पर चलने का मार्ग प्रशस्त करता है।
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