एक नए अध्ययन में पाया गया है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान 78 प्रतिशत बुजुर्गों ने कम से कम एक जलवायु-संबंधी खतरे का सामना किया है। रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी की लहरों के दौरान अधिकांश प्रभावित बुजुर्ग घरों के भीतर रहना पसंद करते हैं। लगभग 90 प्रतिशत लोगों ने धूप और गर्मी से बचने के लिए घर में रहने की बात कही। वहीं 81 प्रतिशत लोगों ने अधिक पानी पीकर खुद को सुरक्षित रखने का प्रयास किया। इसके बावजूद 74 प्रतिशत मामलों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती देखी गईं। अध्ययन में पाया गया कि 44 प्रतिशत बुजुर्गों की पहले से मौजूद बीमारियां और गंभीर हो गईं। करीब 33 प्रतिशत लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन के बुजुर्गों पर पड़ रहे बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती है। यह अध्ययन विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर जारी किया गया। यह दिवस हर वर्ष 15 जून को मनाया जाता है। अध्ययन में ‘जलवायु-सहिष्णु वृद्धावस्था: देखभाल, गरिमा और स्वायत्तता सुनिश्चित करना’ पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए अधिक प्रभावी नीतियां बनाने की मांग की है।
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