गूगल एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम के साथ मिलकर एक अनूठे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य पुराने और बेकार हो चुके स्मार्टफोन को डेटा सेंटर के रूप में परिवर्तित करना है। इस पहल के तहत, उपयोग में न आने वाले स्मार्टफोन्स की प्रोसेसिंग शक्ति को एक साथ जोड़कर उसे कंप्यूटिंग के कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे न केवल ई-कचरे (e-waste) की समस्या कम होगी, बल्कि पुराने हार्डवेयर का अधिकतम उपयोग भी संभव हो सकेगा। गूगल का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में डेटा प्रबंधन के तरीके को पूरी तरह से बदल सकती है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट अपनी शुरुआती रिसर्च स्टेज में है, जहाँ टीम स्मार्टफोन के हार्डवेयर और उनके सीमित संसाधनों को डेटा सेंटर की जरूरतों के अनुरूप ढालने पर शोध कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक छोटे और मध्यम स्तर के कंप्यूटिंग कार्यों के लिए बेहद किफायती साबित हो सकती है। यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार का एक बेहतरीन संगम है, जिससे बेकार पड़े फोन को ‘खजाना’ माना जा रहा है। आने वाले समय में, यह प्रोजेक्ट क्लाउड कंप्यूटिंग की लागत को कम करने में भी सहायक हो सकता है। यह तकनीक किस प्रकार से सुरक्षित और कुशल डेटा प्रोसेसिंग सुनिश्चित करेगी, इस पर विस्तृत शोध अभी जारी है।
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