मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर पिछले पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें महंगाई में वृद्धि का प्रमुख कारण रहीं। लगातार ऊंचे तापमान का असर सब्जियों, डेयरी उत्पादों और अंडों की कीमतों पर देखा गया। इन वस्तुओं के महंगे होने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईंधन की खुदरा कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी भी हुई। हालांकि ईंधन महंगाई मई में 0.8 प्रतिशत पर सीमित रही। यह अप्रैल के 0.7 प्रतिशत की तुलना में मामूली अधिक है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा प्रभाव जून के आंकड़ों में अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है। क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि गर्म मौसम ने खाद्य महंगाई को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बढ़ती महंगाई उपभोक्ता खर्च और घरेलू बजट को प्रभावित कर सकती है। नीति-निर्माताओं की नजर अब आने वाले महीनों के मूल्य रुझानों पर रहेगी। खाद्य और ईंधन कीमतों की दिशा भविष्य की महंगाई दर तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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