नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच मरीजों की अपीलों को लेकर खींचतान बढ़ गई है। मरीजों को न्याय दिलाने के लिए जब मंत्रालय से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया, तो मंत्रालय ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि NMC, 2019 के अधिनियम के तहत गठित एक सर्वोच्च वैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य चिकित्सा शिक्षा और पेशे को विनियमित करना है। मंत्रालय के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा से जुड़े नियमों को बनाना, उनमें संशोधन करना और उनका क्रियान्वयन करना पूरी तरह से NMC के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस रुख के कारण अब मरीजों की अपीलों का भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है। NMC और मंत्रालय के बीच इस जिम्मेदारी के हस्तांतरण से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति प्रशासनिक अस्पष्टता को दर्शाती है। मरीजों के पास अब यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें अपनी शिकायतों के निपटारे के लिए किसके पास जाना चाहिए। यह पूरा घटनाक्रम चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र की नियामक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
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